गगन मै थाल अनुक्रम रवींद्रनाथ टैगोर के विचार पाठ व अनुवाद बाहरी कड़ियाँ सन्दर्भ दिक्चालन सूचीनोकिया म्यूज़िक स्टोर पर आरती "गगन में थाल"अमेज़न.कॉम पर आरती "गगन में थाल"
गुरु नानक देवआरती
आरतीसिखोंगुरु नानक देवपुरीश्री जगन्नाथ जी मंदिरअमृतसरहरिमंदिर साहिबरहरास साहिबअरदासरवींद्रनाथ टैगोरबलराज साहनीशांति निकेतनभारत का राष्ट्रगान
गगन मैं थाल, रव चंद दीपक बने। .. यह आरती सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी द्वारा उच्चारित है।[1] उन्होंने यह आरती 1506[2] या 1508[3][4] में पूर्वी भारत की यात्रा के दौरान पुरी के श्री जगन्नाथ जी मंदिर में उच्चारण की थी।[2][3]अमृतसर स्थित सिखों के तीर्थ स्थल श्री हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में प्रतिदिन संध्या समय रहरास साहिब के पाठ व अरदास के साथ यह आरती की जाती है।
अनुक्रम
1 रवींद्रनाथ टैगोर के विचार
2 पाठ व अनुवाद
3 बाहरी कड़ियाँ
4 सन्दर्भ
रवींद्रनाथ टैगोर के विचार
कई महान कविताओं व भारत के राष्ट्रगान के रचयिता आचार्य रवींद्रनाथ टैगोर से एक बार प्रख्यात फिल्म कलाकार बलराज साहनी, जो तब शांति निकेतन में अध्यापक थे, ने प्रश्न किया कि जिस प्रकार भारत का राष्ट्रगान उन्होंने लिखा है तो क्यों न सम्पूर्ण विश्व के लिए भी एक विश्वगान भी लिखें? इस पर उन्होंने कहा कि वह तो पहले ही लिखा जा चुका है, १६वीं शताब्दी में गुरु नानक के द्वारा। और यह मात्र इस विश्व ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के लिए गान है। गुरुदेव टैगोर इस आरती से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने स्वयं बांग्ला में इसका अनुवाद भी किया।[2][3]
पाठ व अनुवाद
गुरु नानक ने अपनी आरती में परमात्मा के विराट स्वरुप का चित्रण किया है और कल्पना की है कि समस्त ब्रह्माँड ही उसकी पूजा में लीन है। आरती के प्रारंभिक बोल इस प्रकार हैं:
गगन मैं थाल, रवि चंद दीपक बने,
तारका मंडल जनक मोती।
धूपु मलआनलो, पवण चवरो करे,
सगल बनराइ फुलन्त जोति॥
कैसी आरती होइ॥
भवखंडना तेरी आरती॥
अनहत सबद बाजंत भेरी॥
अर्थात्-आकाश रूपी आरती के थाल में सूर्य और चंद्र दीपक के समान प्रज्ज्वलित हैं, तारा मंडल मोतियों की तरह शोभायमान हैं। मलय पर्वत से आती चंदन की सुगंध ही धूप है, वायु चंवर कर रही है, समस्त वनों की सम्पूर्ण वनस्पति तुम्हारी आरती के निमित्त फूल की तरह अर्पित है। अनहद शब्द भेरी की तरह बज रहा है। हे भवखंडन! तुम्हारी आरती की भव्यता का किस तरह वर्णन किया जा सकता है!!
बाहरी कड़ियाँ
- नोकिया म्यूज़िक स्टोर पर आरती "गगन में थाल"
- अमेज़न.कॉम पर आरती "गगन में थाल"
सन्दर्भ
↑ http://www.livehindustan.com/news/tayaarinews/tayaarinews/article1-story-67-67-199585.html गुरु नानक देव और उनके द्वारा प्रवर्तित मार्ग
↑ अआइ http://www.orissa.gov.in/e-magazine/orissareview/2012/Feb-March/engpdf/1-6.pdf
↑ अआइ http://www.barusahib.org/Assets/Publications/Natures_Own_Arti.pdf
↑ http://www.sikh-heritage.co.uk/Scriptures/Guru%20Granth/Guru%20Granth.htm
-आरती, गुरु नानक देव