सेला पास (दर्रा) अनुक्रम सुरंग धर्म अनुश्रुति संदर्भ दिक्चालन सूचीSela pass tunnelEconomic Times

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अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी दर्रे
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सेला दर्रा (अथवा से ला, ला का मतलब दर्रा से है) भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य में तवांग और वेस्ट कामेंग जिले के मध्य अवस्थित एक उच्च तुंगता वाला पहाड़ी दर्रा है। इसकी ऊँचाई 4,170 मीटर (13,700 फुट) है और यह तिब्बती बौद्ध शहर तवांग को दिरांग और गुवाहाटी.से जोड़ता है। इस दर्रे से होकर ही तवांग शेष भारत से एक मुख्य सड़क के माध्यम से जुड़ा हुआ है। इस दर्रे के आस-पास वनस्पतियाँ अल्प मात्रा में उगती हैं तथा यह क्षेत्र आमतौर से वर्ष भर बर्फ से ढंका होता है। इस दर्रे के शिखर के नजदीक स्थित सेला झील इस क्षेत्र में स्थित लगभग 101 पवित्र तिब्बती बौद्ध धर्म के झीलों में से एक है।
अनुक्रम
1 सुरंग
2 धर्म
3 अनुश्रुति
4 संदर्भ
सुरंग
भारत सरकार ने 2018-19 के बजट में सभी मौसम में परिवहन की सुविधा से युक्त सेला दर्रा सुरंग के निर्माण हेतु वित्तपोषण की घोषणा की।[1]
धर्म
सेला दर्रा तिब्बती बौद्ध धर्म का एक पवित्र स्थल है। बौद्धों का मानना है कि यहाँ आस-पास में 101 पवित्र झीलें हैं।
अनुश्रुति
एक अनुश्रुति के अनुसार 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान जसवंत सिंह रावत नामक भारतीय सेना के एक वीर जवान ने इस दर्रे के नजदीक चीनी सैनिकों के खिलाफ अकेले युद्ध किया था। जसवंत सिंह रावत को उनके साहस एवं कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए मरणोपरांत महा वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
संदर्भ
↑ Sela pass tunnel, Economic Times, 1 Feb 2018.
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