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भारतीय आयोग
भारतएम॰ एस॰ स्वामीनाथनथी
राष्ट्रीय किसान आयोग ( National Commission on Farmers (NCF)) भारत का एक आयोग है जिसका गठन १८ नवम्बर २००४ को किया गया था। इसके अध्यक्ष एम॰ एस॰ स्वामीनाथन हैं। आयोग ने चार रपट दिये- दिसम्बर २००४ में, अगस्त २००५ में, दिसम्बर २००५ में, और अप्रैल २००६ में। पाँचवाँ तथा अन्तिम रपट ४ अक्टूबर २००६ को प्रस्तुत की गयी थी। इन रपटों में 'अधिक तेज तथा अधिक समावेशी विकास' की प्राप्ति के लिये उपाय सुझाये गये थे जो ११वीं पंचवर्षीय योजना का एक लक्ष्य था।
अनुक्रम
1 आयोग की संस्तुतियाँ
1.1 भूमि बंटवारा
1.2 भूमि सुधार
1.3 सिंचाई सुधार
1.4 उत्पादन सुधार
1.5 ऋण और बीमा (इंश्योरेंस)
1.6 खाद्य सुरक्षा
1.7 वितरण प्रणाली में सुधार
1.8 प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाना
1.9 रोजगार सुधार
2 इन्हें भी देखें
3 बाहरी कड़ियाँ
आयोग की संस्तुतियाँ
भूमि बंटवारा
आयोग का पहला महत्वपूर्ण बिंदु यही था। जमीन बंटवारे को लेकर इसमें चिंता जताई गई थी। इसमें कहा गया था कि 1991-92 में 50 प्रतिशत ग्रामीण लोगों के पास देश की सिर्फ तीन प्रतिशत जमीन थी। जबकि कुछ लोगों के पास ज्यादा जमीन थी। ऐसे में इसके सही व्यवस्था की जरूरत बताई गई थी।
भूमि सुधार
बेकार पड़ी और अतिरिक्त (सरप्लस) जमीनों की सीलिंग और बंटवारे की सिफारिश की गई थी। इसके साथ ही खेतीहर जमीनों का गैर कृषि इस्तेमाल पर चिंता जताई गई थी। जंगलों और आदिवासियों को लेकर भी विशेष नियम बनाने की बात कही गई थी। साथ ही राष्ट्रीय भूमि-उपयोग सलाह सेवा के स्थापना की बात भी थी। इसका काम परिस्थितिकी, मौसम और बाजार को देखना होता।
सिंचाई सुधार
सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी आयोग ने चिंता जताई थी। साथ ही सलाह दी थी कि सिंचाई के पानी का उपलब्धता सभी के पास होनी चाहिए। इसके साथ ही पानी की सप्लाई और वर्षा-जल के संचय पर भी जोर दिया गया था। पानी के स्तर को सुधारने पर जोर देने के साथ ही ‘कुआं शोध कार्यक्रम’ शुरू करने की बात कही गई थी।
उत्पादन सुधार
आयोग का कहना था कि कृषि में सुधार के लिए एक समग्र प्रयत्न की जरूरत है। इसमें लोगों की भूमिका को बढ़ाना होगा। इसके साथ ही कृषि से जुड़े सभी कामों में ‘जन सहभागिता’ / पब्लिक इंवेस्टमेंट की जरूरत होगी। चाहें वह सिंचाई हो, जल-निकासी हो, भूमि सुधार हो, जल संरक्षण हो या फिर सड़कों और कनेक्टिविटी को बढ़ाने के साथ शोध से जुड़े काम हों।
ऋण और बीमा (इंश्योरेंस)
इसमें कहा गया था कि ऋण प्रणाली की पहुंच सभी तक होनी चाहिए। फसल बीमा की ब्याज-दर 4 प्रतिशत होना चाहिए। कर्ज वसूली पर रोक लगाई जाए। साथ ही कृषि जोखिम फंड भी बनाने की बात आयोग ने की थी। पूरे देश में फसल बीमा के साथ ही एक कार्ड में ही फसल भंडारण और किसान के स्वास्थय लेकर व्यवस्थाएं की जाएं। मानव विकास और गरीब किसानों के लिए विशेष योजना की बात कही गई थी।
खाद्य सुरक्षा
आयोग ने समान जन वितरण योजना की सिफारिश की थी। साथ ही पंचायत की मदद से पोषण योजना को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की भी बात थी। साथ ही स्वयं सहायक समूह बनाकर कम्यूनिटी खाद्य एवं जल बैंक बनाने की बात भी कही गई थी। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के साथ ही गरीब किसानों की मदद को लेकर अन्य योजनाओं के बारे में आयोग ने विस्तार से लिखा था।
किसान आत्महत्या रोकना :
किसानों की बढ़ती आत्महत्या को लेकर भी आयोग ने चिंता जताई थी। इसके साथ ही ज्यादा आत्महत्या वाले स्थानों का चिह्नित कर वहां विशेष सुधार कार्यक्रम चलाने की बात कही थी। सभी तरह की फसलों के बीमा की जरूरत बताई गई थी। साथ ही आयोग ने कहा था कि किसानों के स्वास्थ्य को लेकर खास ध्यान देने की जरूरत है। इससे उनकी आत्महत्याओं में कमी आएगी।
वितरण प्रणाली में सुधार
इसे लेकर भी आयोग ने कई सिफारिशें की थी। इसमें गांव के स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पूरी व्यवस्था का खांका खींचा गया था। इसमें किसानों को पैदावार को लेकर सुविधाओं को पहुंचाने के साथ ही विदेशों में फसलों को भेजने की व्यवस्था थी। साथ ही फसलों के आयात और उनके भाव पर नजर रखने की व्यवस्था बनाने की सिफारिश भी थी।
प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाना
आयोग ने किसानों में प्रतिस्पर्धा (कंपटीटिवनेस) को बढ़ावा देने की बात कही है। इसके साथ ही अलग-अलग फसलों को लेकर उनकी गुणवत्ता और वितरण पर विशेष नीति बनाने को कहा था। न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने की बात कही गई थी।
रोजगार सुधार
खेती से जुड़े रोजगारों को बढ़ाने के लिए बातें कही गई थी। आयोग ने कहा कि सन 1961 में कृषि से जुड़े रोजगार में 75।0 प्रतिशत लोग लगे थे जो कि 1999 से 2000 काफी कम 59।9 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके साथ ही किसानों के लिए ‘नेट टेक होम इनकम’ को भी तय करने की बात कही गई थी।
इन्हें भी देखें
- एम॰ एस॰ स्वामीनाथन
- न्यूनतम समर्थन मूल्य
बाहरी कड़ियाँ
राष्ट्रीय किसान आयोग का जालघर- राष्ट्रीय किसान आयोग
- राष्ट्रीय किसान आयोग की रिपोर्ट में मुख्य सुझाव
- किसान आयोग की संस्तुति लागू हो
- स्वामीनाथन रिपोर्ट: किसानों पर राष्ट्रीय आयोग
-भारतीय आयोगAAWq7Db71Y44ffdW XXJ4WVARx1LcDpz,3wo7l8I cniH DrX,vRF68JAy V6vWjL8TV8d,tLGHl5e0C EbkxDakduyYA3DXcvmiI